दुमका, जून 14 -- जरमुंडी प्रतिनिधि। बासुकीनाथ में आयोजित श्री रामकथा के आठवें दिन शांतनु महाराज ने भरत का चरित्र का वर्णन किया। चित्रकूट में भरत और श्री राम का मिलाप व संवाद सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। यह भी पढ़ें- माता जानकी की विदाई सुन नम हुई आंखें, राम विवाह उत्सव में झूमे श्रद्धालुभरत की दुख भरी कहानी शांतनु महाराज ने कहा कि भरत जी को जब पता चला कि उनकी माता कैकेई ने राम जी को वन भेज दिया है तो उनपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। भरत जी ने चित्रकूट जाने के लिए सबको तैयार किया और चित्रकूट में जाकर राम जी से मिले। भरत जी को देखकर भगवान राम के धनुष बाण गिर पड़े। प्रभु राम जी से भरत जी ने वापस लौटने की प्रार्थना की, पर राम जी ने कहा यदि मैं अयोध्या लौट चलूंगा तो शबरी माता को दर्शन कैसे दे पाउंगा। भगवान ने अपनी चरण पादुका देकर भरत जी को अय...