लखनऊ, अगस्त 23 -- लोहिया विधि विवि में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के 10 साल पूरे होने पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन बी. लोकुर ने बाल देखभाल संस्थानों के सोशल ऑडिट की जरूरत बताई। संस्थानों में भीड़भाड़ और बच्चों की देखभाल से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देने की बात कही। लोहिया विधि विवि के कुलपति प्रो.अमर पाल सिंह ने कहा कि बच्चों को संविधान में मिले सभी अधिकार समान रूप से मिलना जरूरी है। अभियोजन निदेशालय के निदेशक ललित मुद्गल ने किशोर न्याय बोर्ड में सरकारी वकील की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कई किशोर न्याय बोर्ड अभी भी बच्चों के अनुकूल नहीं हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की महानिदेशक (जांच) अनुपमा नीलेकर चंद्रा ने कहा कि बच्चों के अपराध में शामिल होने के कारणों को समझन...