वाराणसी, अगस्त 7 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। यह गलत धारणा है कि बुजुर्ग होने के बाद कथा-पूजा में मगन होना चाहिए। जो मनुष्य बाल्यावस्था से ही ईश्वर की शरण में रहेगा, उस पर कलियुग का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। ये बातें अभिराम दास ने कहीं। वह भदऊ चुंगी स्थित श्री साईं धाम में श्रीमद्भावत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ईश्वर की शरण में न रहने वाले युवा ही मार्ग भटक जाते हैं। उन्हें मंदिरा, व्यभिचार, चुगली जैसे दोषों से मुक्त रहना चाहिए। वृंदावन धाम के युवा संत अभिराम दास ने श्रीमद्भागवत और उसके प्रसंग-नारद संवाद, स्तुति, महाभारत प्रसंग, राजा परीक्षित जन्म, कलियुग की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।आरंभ में मुख्य यजमान प्रदीप मिश्रा ने पोथी की विधिवत पूजा अर्चना की, कथावाचक को माल्यार्पण किया। अंत में मुकुंद ला...