दुमका, जून 18 -- राजकुमार कुशवाहा दुमका। दो दशक पूर्व संताल परगना के नदियों में जहां पानी का ठहराव होता था, अब यहीं नदियां सूख चूकी है। नदियों से हुए अंधाधुन बालू का दोहन अब नदियों के अस्तित्व को ही मिटा रहा है। पहले जहां 40 से 50 फीट जमीन के नीचे बोरिंग किए जाने पर पानी मिल जाता था, अब 400 से भी अधिक फीट नीचे इस क्षेत्र के अधिकांश क्षेत्रों में हो गया है। आज नदियों का अस्तित्व को बचाने के दिशा में कोई व्यापक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाला समय और भी कष्टदायी साबित होगा। नदियों में अब मिट्टी व जंगल झाड़ ही नजर आते हैं। इसका नतीजा हो रहा है कि अब बरसात के समय परनी का ठहराव नदियों में ज्यादा देर तक नहीं हो रहा है। नदी का पानी बह कर चला जा रहा है। इसका एक मात्र कारण नदियों से अत्यधिक बालू का उठाव ही है। यह भी पढ़ें- वर्ष भर फसलों ...