मेरठ, जून 12 -- सरकार एवं श्रम विभाग के साथ ही विभिन्न संस्थाओं, संगठनों का पूरा फोकस जिले को बालश्रम मुक्त बनाने का है लेकिन इसके बावजूद शहर ही नहीं बल्कि देहात में भी गरीब परिवारों के बच्चे-किशोर स्कूल जाने के बजाए विभिन्न उद्योगों एवं दुकानों पर औजार थामे नजर आते हैं। वह अपना बचपन कमाई के लिए कामकाज में खपा रहे हैं। शहर-कस्बों में चाय, वाहन रिपेयरिंग सेंटरों में बाल श्रमिक एवं किशोर आज भी नजर आ जाते हैं। कुछ बच्चे तो खतरनाक उद्योगों तक में हैं। दो वर्षों में बालश्रम से मुक्त कराए 518 बच्चे यह भी पढ़ें- बालश्रम में खप रहा बचपन, जागरुकता बढ़े तो मिटे कलंकबाल श्रम से मुक्ति श्रम विभाग की ओर से चलाए गए अभियान के आंकड़ों को देखें तो दो सालों में बाल श्रम से कई बच्चों को मुक्त कराया गया। पिछले साल श्रम विभाग ने 58 बाल श्रमिक एवं 431 किशोरों ...