कन्नौज, फरवरी 23 -- छिबरामऊ, संवाददाता। बार एसोसिएशन छिबरामऊ के युवा अधिवक्ता प्रणव सक्सेना ने प्रस्तावित अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2025 पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे बार की स्वतंत्रता पर आघात बताया है। उन्होंने कहा कि वकालत किसी सरकार की अधीनस्थ शाखा नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था का स्वतंत्र और सशक्त स्तंभ है, जिसकी स्वायत्तता ही उसकी वास्तविक शक्ति है। प्रणव सक्सेना ने आरोप लगाया कि विधेयक के कई प्रावधान पेशेवर स्वशासन को कमजोर करने वाले हैं। हड़ताल के अधिकार को दंडात्मक ढांचे में बांधना, बार काउंसिल की संरचना में सरकारी हस्तक्षेप की संभावना बढ़ाना तथा वन बार-वन वोट जैसी व्यवस्था लागू करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुधारों का विरोध नहीं है, लेकिन अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति के अधिकार और संस्था...
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