ललितपुर, अप्रैल 29 -- ललितपुर। कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी-उर्दू-अदबी संगम के पुनर्गठन के अवसर पर कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन हुआ। पूर्व पार्षद के फार्म हाउस पर यह कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। जिसमें श्रोताओं ने गीतों और गजलों का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सीएमएस डा. खेमचन्द्र वर्मा कबीर ने की। शायरों और कवियों ने अपने-अपने अंदाज में प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सरोकारों पर रचनाएं प्रस्तुत कीं। रामकृष्ण कुशवाहा ने कहा कि बारूद की खेती अच्छी नहीं, बमों की बंद बरसात करो, हाथ तो बहुत मिलाया है, अब दिल मिलाने की बात करो। सुमनलता चांदनी ने गजल पेश करते हुए कहा कि यादों के झरोखों से जब हम ख्वाबों को सजाते हैं, चांद जैसे चेहरे हमें अक्सर याद आते हैं। राधेश्याम ताम्रकार ने कहा कि जिसको दुनिया की हकीकत का पता ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.