नई दिल्ली, मार्च 14 -- भारतीय संविधान ने समाज में समानता की राह तैयार कर दी थी, पर सारे लोग उस राह पर चलने को तैयार नहीं थे। संविधान को लागू हुए आठ वर्ष बीत चुके थे और संविधान के एक बड़े निर्माता बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की जयंती आने वाली थी। खुद बाबा साहब दो साल पहले ही दुनिया से रुखसत हुए थे। तब दलितों-शोषितों का एक सजग तबका था, जो बाबा साहब को दिलो-जान से याद रखना चाहता था। ऐसे ही सजग लोगों में शुमार थे चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी दीना भामा, जिन्हें आंबेडकर जयंती पर छुट्टी चाहिए थी। वह पुणे स्थित अपने विस्फोटक अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला के कार्यालय में बड़े साहब के सामने आवेदन लिए खड़े थे। साहब छुट्टी देने को तैयार न थे और दीना अड़े हुए थे कि छुट्टी लेकर रहेंगे। बात इतनी बिगड़ी कि साहब ने दीना पर अनुशासनहीनता का आरोप जड़ा और नौकरी से ...
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