बागपत, मई 11 -- बागपत। दाहा क्षेत्र के मौजिजाबाद नांगल में जहां चार सौ वर्ष पूर्व बाबा छोटेनाथ और बाबा लिच्छी नाथ ने कठोर तपस्या के बाद समाधि ली थी, आज वह पावन स्थान तपोस्थली बन चुका है। यहां बने श्री शिव गोरखनाथ आश्रम की दिव्य सुगंध बागपत ही नहीं दूसरे जनपदों के साथ राजस्थान तक फैल रही है। पर्यटन विभाग ने आश्रम का कायाकल्प किया, जिसके बाद करीब 23 बीघा भूमि पर बने इस आश्रम की भव्यता देखते ही बनती है। श्री शिव गोरखनाथ आश्रम में शिव मंदिर, माता मंदिर के अलावा हनुमान, भैरव, शनिदेव, नवनाथ गोरखनाथ समेत कई अन्य देवी-देवाताओं के मंदिर और साधु-संतों की समाधियां हैं। यहां सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक भक्ति भजनों की बयार बहती है। केंद्र सरकार के सहयोग और महंत अर्जुन नाथ के योगदान से यह आश्रम पूजा-अर्चना का बड़ा केंद्र बन चुका है। ग्रामीणों ने बताया...