बांस, भांग और केले से संभव होगी हरित फाइबर क्रांति
नई दिल्ली, मई 29 -- गिरिराज सिंह,केंद्रीय वस्त्र मंत्री फाइबर के साथ भारत का 5,000 साल पुराना सभ्यतागत संबंध है, जो हमारे गांवों, हमारी परंपराओं और सामूहिक पहचान में गहरे गुंथा हुआ है। 'बुनी हुई हवा' कहलाने वाली मोहनजोदड़ो की प्रसिद्ध मलमल से लेकर संसार के सभी महाद्वीपों तक फैली भारतीय कारीगरी तक फाइबर हमेशा से हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा रहा है। आज, जब दुनिया क्रांतिकारी वैश्विक स्थिरता के कगार पर खड़ी है, तब यही प्राचीन ज्ञान हमारी सबसे बड़ी प्रतिस्पर्द्धात्मक शक्ति है। दशकों तक केले के पेड़ के तने को बेकार मानकर फेंक दिया जाता था, लेकिन आज वही बायोमास प्रीमियम फाइबर बनकर निर्यात बाजारों की मांग पूरी कर रहा है, ग्रामीण आजीविका को सशक्त बना रहा है और इस कृषि अवशेष को राष्ट्रीय आय में बदल रहा है। अपशिष्ट से समृद्धि तक, स्थानीय ...
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