कानपुर, जुलाई 19 -- फोटो कानपुर, प्रमुख संवाददाता। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से सम्मेलन आयोजित किया गया। इंडियन सोसाइटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स को प्रजनन चिकित्सा और आर्टिफिशियल रिप्रोडक्टिव तकनीक की नवीनतम तकनीकों के बारे में बताया गया।विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में 10 से 15 प्रतिशत दंपति बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं। बदलती जीवनशैली और देर से गर्भधारण की प्रवृत्ति के कारण एआरटी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में युवा डॉक्टरों को इस क्षेत्र का बेहतर प्रशिक्षण देना समय की मांग है। डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवा चिकित्सकों के ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं। प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय क...