हिन्दुस्तान ब्यूरो, अगस्त 4 -- बिहार की सियासत के लिहाज से अहम मानी जाने वाली बांकीपुर सीट पर भाजपा की हार उसके लिए बड़ा झटका है। यह सीट 31 साल से भाजपा के कब्जे में रही थी। इसलिए इसे भाजपा का अभेद्य गढ़ भी मान लिया गया था। इस लिहाज से बांकीपुर की पराजय सिर्फ एक सीट के उपचुनाव की हार नहीं है। बीजेपी के लिए यह सीट नाक की लड़ाई थी। अति आत्मविश्वास और नामांकन के बाद प्रत्याशी बदलना ऐसे कई कारण रहे जिसकी वजह से इस उपचुनाव में बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी और प्रशांत किशोर जीत गए । विशुद्ध रूप से शहरी क्षेत्र वाले इस विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने पार्टी को दो टूक संदेश भी दिया है कि अब जातीय समीकरण मतदान का आधार नहीं रहा। उसे जमीन पर काम, जवाबदेही और बेहतर नेतृत्व चाहिए। इस चुनाव परिणाम ने यह भी बता दिया है कि भाजपा के लिए आत्ममंथन और रणनीति ब...