बांका, जनवरी 11 -- बांका जिले में तेजी से सिकुड़ती और सूखती नदियों के अस्तित्व को बचाने के लिए अब जनप्रतिनिधि भी खुलकर सामने आ गए हैं। ओढ़नी, चांदन, बदुआ, चीर, सुखनियां आदि नदियां कभी जिले की जीवनरेखा मानी जाती थीं, लेकिन अतिक्रमण, अवैध बालू उठाव, जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण आज इनका भविष्य संकट में है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सांसद व विधायक लगातार जनजागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी पहल की बात कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे नदियों को केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि अपनी धरोहर समझें और इनके संरक्षण में सहभागी बनें। बताया गया कि नदियों के सूखने से भूजल स्तर गिर रहा है, खेती प्रभावित हो रही है और पेयजल संकट गहराता जा रहा है। इसे लेकर सांसद ने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे को संस...
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