रांची, जुलाई 1 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि विभाग की गलत और अवैध कार्रवाई का दुष्परिणाम किसी कर्मचारी पर नहीं थोपा जा सकता। यदि किसी कर्मचारी की बर्खास्तगी को न्यायालय अवैध घोषित कर देता है, तो पुनर्बहाली के बाद उसकी बर्खास्तगी अवधि को नो वर्क-नो पे बताकर वेतन एवं अन्य सेवा लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने पथ निर्माण विभाग के कर्मचारी अमरेश कुमार झा को बड़ी राहत देते हुए विभाग के संबंधित आदेश को रद्द कर दिया। पथ निर्माण विभाग ने 13 नवंबर 2017 को अमरेश कुमार झा को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। उन्होंने इस कार्रवाई को मनमाना और कानून के विरुद्ध बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद वर्ष 202...