अलीगढ़, फरवरी 14 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और शारीरिक निष्क्रियता सिर्फ मोटापे की नहीं, बल्कि निसंतानता की गंभीर चुनौती बन चुकी है। पहले जहां बांझपन के मामले सीमित थे, वहीं अब युवा दंपतियों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। देर से विवाह, हार्मोनल असंतुलन और तनावपूर्ण दिनचर्या ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। परिणामस्वरूप हर तीसरा दंपति अब उपचार का सहारा लेने को मजबूर हैं। यह चिंता का विषय है कि पिछले दो दशक में बांझपन का आंकड़ा 22 से बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आधुनिक जीवनशैली का प्रभाव अब पारिवारिक जीवन पर भी स्पष्ट दिखने लगा है। आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. स्वाति वार्ष्णेय बताती हैं कि कुछ अध्ययनों के अनुसार पिछले दो दशकों में बांझपन के मामले 40 प्रतिशत तक बढ़े हैं। देर से विवाह, फिर संतान योजना, खराब खानपान...