गंगापार, फरवरी 16 -- फरवरी माह में बढ़ते तापमान ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। क्योंकि फरवरी का महीना ही गेहूं की बालियों में दाना भरने का सबसे अहम दौर होता है। इस चरण में तापमान बढ़ने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिक शशिकांत तिवारी का मानना है कि तापमान बढ़ने का समय और उसकी तीव्रता दोनों ही बेहद अहम हैं। अगर फरवरी 15 से पहले तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है तो जोखिम ज्यादा होता है। वहीं दिन का तापमान अगर 26 से 27 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहता है तो आमतौर पर फसल को नुकसान नहीं होता। लेकिन अगर यह तापमान लंबे समय तक 28 से 29 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर बना रहता है तो उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। मौसम विभाग का यही अनुमान किसानों की चिंता का कारण बना है। इस चरण में तापमान बढ़ने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकत...
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