नई दिल्ली, जुलाई 10 -- अरुण कुमार,वरिष्ठ अर्थशास्त्री अक्तूबर 2022 में मैंने कुछ अर्थशास्त्रियों व गांधीवादियों के साथ मिलकर एक शोध-कार्य किया था, जिसका निष्कर्ष था कि 32 करोड़ लोग अच्छे रोजगार में हैं, जबकि 28 करोड़ भारतीय या तो बेरोजगार हैं अथवा उनके पास ढंग का काम नहीं है। इसका अर्थ था कि भारत में एक कार्यरत व्यक्ति के ऊपर 4.5 लोगों के जीवन का भार था। इसमें यदि बेरोजगार और जैसे-तैसे नौकरी करने वाले उन 28 करोड़ लोगों को भी जोड़ दें, तब भी हर कार्यरत कर्मी के ऊपर 2.4 व्यक्ति का दायित्व भार पाया गया था। इस रिपोर्ट की चर्चा मैंने इसलिए की, क्योंकि किसी भी देश की आबादी वहां के सामाजिक-आर्थिक पहलू से जुड़ी होती है और जनसंख्या वरदान है या शाप, इसका निर्धारण उस देश की नीतियों से होता है। ऐसे में, उचित यही है कि उपलब्ध रोजगार के नजरिये से जनसंख...