रांची, दिसम्बर 31 -- तोरपा, प्रतिनिधि। प्रख्यात कथावाचक संगीता किशोरी जी ने बुधवार को तोरपा महावीर मंदिर में सत्संग करते हुए संत तुलसीदास के दोहे बिनु सत्संग विवेक न होई के साथ कथा प्रारंभ किया। उन्होने कहा कि सत्संग बड़े भाग्य से मिलता है। कथा सुनानेवाला तो भाग्यशाली है ही, लेकिन कथा सुनने वाले भी बड़भागी कहे गये हैं। उन्होंने कहा सत्संग का अर्थ है सत्य का संग करना। तुलसीदास कहते है कि संत्संग के बिना विवेक नहीं आता है। विवेकहीन मनुष्य पशु के समान होता है। उन्होंने कहा भक्तिशास्त्र के अनुसार भगवान के चार विग्रह हैं। नाम, रूप, लीला और धाम माने गये हैं। इन चारों में नाम के रूप में भी इश्वर हैं। इसमें से किसी एक का भी आश्रय लेने से मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है। उन्होंने कहा पूजन सभी देवी देवताओं की करो पर इष्ट केवल एक होनी चाहिए। उन्होंने...