बुलंदशहर, जुलाई 15 -- बुलंदशहर। सरकारी स्कूलों के नौनिहालों को कुपोषण से बचाने और उन्हें प्राथमिक स्तर पर ही पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के सरकारी दावे बाजार की महंगाई के आगे बेदम साबित हो रहे हैं। पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना के तहत परिषदीय और मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को दिए जाने वाले मौसमी फलों का जायका बाजार के आसमान छूते दामों ने पूरी तरह छीन लिया है। पिछले एक दशक से बच्चों को मिलने वाले फल का बजट मात्र चार रुपये प्रति छात्र पर ही थमा हुआ है, जबकि इस अवधि में बाजार में फलों की कीमतें दो से चार गुना तक बढ़ चुकी हैं। बजट में इजाफा न होने से बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक और माध्यमिक के कक्षा आठ तक के करीब 2.35 लाख से अधिक छात्र सस्ते फलों पर निर्भर हैं। बच्चों को या तो केले मिलते हैं या इसके अलावा कोई ...