रांची, सितम्बर 27 -- रांची, वरीय संवाददाता। होटल बीएनआर चाणक्य में तीन दिनों से चल रहे पांचवें अखिल भारतीय नेत्र सम्मेलन (एआईओएस मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस-2026) का रविवार को समापन हुआ। सम्मेलन के अंतिम दिन नेत्र विशेषज्ञों ने बच्चों की आंखों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के साथ ग्लूकोमा की समय पर पहचान और उपचार पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रीमैच्योर बच्चों में आंखें सामान्य दिखाई देने के बावजूद रेटिना की गंभीर बीमारी हो सकती है। ऐसे बच्चों में समय पर जांच नहीं होने पर दृष्टि हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है। कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल नई दिल्ली के आरओपी विशेषज्ञ डॉ बिभूति कश्यप ने कहा कि प्रीमैच्योर बच्चों के लिए जन्म के बाद शुरुआती अवधि बेहद महत्वपूर्ण होती है। रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी में शुरुआत में आंखें बाहर से सामान्य दिख सकती हैं। क...