नई दिल्ली, जुलाई 23 -- पंकज चतुर्वेदी,वरिष्ठ पत्रकार पिछले एक दशक में भारत ने स्वच्छता के लिए वह कर दिखाया, जो आजादी के बाद कभी नहीं हुआ था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश में लगभग 12 करोड़ शौचालय बन चुके हैं। केंद्र व राज्य सरकारों ने खरबों रुपये इसके लिए खर्च किए। दुनिया ने ताली बजाई, पर मैदान पर तस्वीर अब भी वही है- टूटे हुए, अस्वच्छ शौचालय और खुले में शौच। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण भारत में हर छठा व्यक्ति खुले में शौच करता है, जबकि कर्नाटक मूल्यांकन प्राधिकरण की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट बताती है कि घर में शौचालय होने के बावजूद राज्य के 27 फीसदी लोग खुले में शौच करना पसंद करते हैं। प्रश्न यह नहीं है कि शौचालय कितने बने, सवाल यह है कि उनका सही इस्तेमाल करना कितनों को आता है? एक ताजा अध्ययन कहता है...