प्रयागराज, अक्टूबर 1 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी केवल पिता पर नहीं डाली जा सकती। सामान्य तौर पर माता-पिता को अपनी आय व आर्थिक क्षमता के अनुसार बच्चे के पालन-पोषण और अन्य खर्चों में योगदान करना होता है। न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ल ने यह टिप्पणी एक महिला और उसके दो नाबालिग बच्चों की याचिका खारिज करते हुए की। याचिका में परिवार न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें दोनों बच्चों के लिए डेढ़-डेढ़ हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण का निर्देश पिता को दिया गया था। हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 125 की योजना पर विचार करते हुए कहा कि इसके तहत नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण का दावा उसके पिता या माता से किया जा सकता है। इसलिए इस वैधानिक जिम्मेदारी को केवल पिता का दायित्त्व नहीं माना जा सकता। कोर...