नई दिल्ली, मई 10 -- भारत में हर साल 37 लाख से ज्यादा नौजवान जेईई और नीट की परीक्षाएं देते हैं। ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में गणित और जीव विज्ञान पढ़ने वाले बच्चों के लिए ये परीक्षाएं अब योग्यता की कसौटी नहीं, जी का जंजाल बन गई हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि बच्चों पर अब सिर्फ पढ़ाई का दबाव नहीं होता, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक दबाव भी उन्हें परेशान करता है। परीक्षा हॉल में घुसने से पहले ही बच्चे टूट रहे हैं। यहां कदाचार रोकने या सख्ती के नाम पर जो कुछ हो रहा है, वह बच्चों के लिए गंभीर मानसिक उत्पीड़न है। लंबी आस्तीन मना, जूते मना, घड़ी मना, रबर बैंड मना। लड़कियों के झुमके, बालों की क्लिप, नाक की लौंग, और तो और, कई बार उनके अंतर्वस्त्र तक चेक किए जा रहे हैं। तीन घंटे के पेपर से पहले दो घंटे गेट पर बच्चों को अपराधियों की तरह लाइन में खड़ा कर...