अंबेडकर नगर, मई 2 -- अम्बेडकरनगर, संवाददाता। कहते हैं जब दुनिया डराती है तो बच्चा मां की गोद में छुप जाता है। आंधी हो, अंधेरा हो या कोई अनजाना भय मां की बांहें ही उसका पहला और आखिरी सहारा होती हैं, लेकिन चार बच्चों की निर्मम हत्या व एक मां पर बच्चों की हत्या का आरोप यदि सही है तो पूरी घटना ने उस भरोसे को ही सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। जिस मां की ममता को सबसे पवित्र माना जाता है, उसी के दामन पर जब ऐसा दाग लगता है तो समाज सिहर उठता है। उन मासूम बच्चों को जब डर लगा होगा तो उन्होंने किसे पुकारा होगा, किसके सीने से लिपट कर खुद को सुरक्षित समझा होगा यह सोच कर दिल कांप जाता है क्योंकि यह सिर्फ चार मासूम जिंदगियों का अंत नहीं, बल्कि उस एहसास का भी टूटना है जिसे हम मां की ममता कहते हैं। यह भी पढ़ें- चार बच्चों की लाशों को देखकर कांप उठा कले...