उत्कर्ष आनंद | नई दिल्ली, अक्टूबर 17 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर व्यक्ति की तरह बच्चों को भी इंटरनेट तक पहुंचने और उसका इस्तेमाल करने का मौलिक अधिकार है। बच्चों की उम्र चाहे जो भी हो, उन्हें इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने आगाह किया कि सुरक्षा के नाम पर बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने से उनकी स्वतंत्रता और निजता प्रभावित हो सकती है। इससे ऑनलाइन दुर्व्यवहार का सामना करने वाले बच्चों के लिए मदद मांगना भी मुश्किल हो सकता है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी चंद्रन की पीठ ने 15 अक्टूबर को पारित आदेश में यह टिप्पणी की। आदेश अब सार्वजनिक हुआ है। अदालत ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। बच्चों को दोनों का अधिकार है। पीठ के मुताबिक, इंटरनेट इस्तेमाल करने का मौलिक अध...