नई दिल्ली, जुलाई 9 -- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 1993 की उस पॉलिसी को लेकर जवाब मांगा है कि जिसके तहत गर्भवती आईपीएस ट्रेनी अफसरों ( भारतीय पुलिस सेवा IPS प्रोबेशनर) को ट्रेनिंग लेने से रोका जाता है। सरकार की इस नीति में कहा गया था कि बच्चे के जन्म के बाद महिला आईपीएस ट्रेनी अफसर को एक साल तक ट्रेनिंग करने की अनुमति नहीं दी जाती। शीर्ष अदालत ने बुधवार को कहा कि महिलाओं के फायदे के लिए बनाया गया नियम उन्हें मौके देने से इनकार करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, अगर वे मेडिकली फिट हैं। आईपीएस ऑफिसर उर्वशी सेंगर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र से गुरुवार तक जवाब मांगा और पूछा कि क्या उन्हें इस साल जून में शुरू हुए फेज-II ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होने की इजाजत दी जा सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी फिट है ...