नई दिल्ली, सितम्बर 16 -- बचपन में पैरेंट्स के साथ सोना बच्चे को अपनेपन और सेफ्टी का एहसास देता है। लेकिन कई घरों में ऐसा देखा जाता है कि बड़े होने के बाद भी बच्चे पेरेंट्स के साथ ही सोते हैं। लेकिन क्या यह हैबिट सही है? देखने में ये बिल्कुल नॉर्मल लग सकता है, लेकिन बच्चे की पर्सनैलिटी पर इसके कई असर देखने को मिल सकते हैं। चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ माला वोहरा बताती हैं कि पेरेंट्स और बच्चों के बीच में मजबूत कनेक्शन होना जरूरी है। लेकिन स्लीपिंग हैबिट्स की वजह से कहीं यह कनेक्शन जरूरत से ज्यादा डिपेंडेंसी में ना बदल जाए, इसका ध्यान देना भी जरूरी है। आइए विस्तार में जानते हैं कि इस बारे में डॉक्टर का क्या कहना है।सिर्फ उम्र देखकर फैसला करना सही नहीं डॉ माला के अनुसार, यहां सिर्फ बच्चे की उम्र को देखकर यह तय करना सही नहीं है कि पेरेंट्स के साथ स...