गौरीगंज, अगस्त 12 -- अमेठी। अंग्रेजी हुकूमत के दौर में आजादी की बात करना भी गुनाह था। ऐसे समय में अमेठी के कोरारी निवासी बाबू बैजनाथ सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद की। उनकी 'बगावत' नज्म लोगों में जोश और जागृति पैदा करती थी। अंग्रेजी सरकार को यह आवाज इतनी नागवार गुजरी कि नज्म पढ़ने पर उन्हें छह महीने की जेल की सजा भुगतनी पड़ी। वर्ष 1939 में थाना बल्दीराय में नज्म पढ़ने पर अंग्रेजी हुकूमत ने बाबू बैजनाथ सिंह को छह महीने की सजा सुनाई। नज्म की पंक्तियां थीं "किसी सोते को गफलत से जगा देना बगावत है, किसी कमजोर के हक को दिला देना बगावत है। अगर सच्चाई का गीत गाना बगावत है, तो हम भी एक बागी हैं, मेरा मजहब बगावत है। यह भी पढ़ें- पिता से प्रेरणा लेकर आजादी की जंग में कूदे थे हरिशंकरबाबू बैजनाथ सिंह की बहादुरी अंग्रेजों की नजर में यह नज्म शासन...