उन्नाव, मार्च 29 -- उन्नाव। चमकती लाइटें, सुरक्षा का कड़ा पहरा और ऊंची दीवारों के पीछे बैठे आलाहाकिम। यह हमारे जिले के उन रसूखदारों की दुनिया है, जिनके एक हस्ताक्षर से व्यवस्थाएं सुधरती और बिगड़ती हैं। प्रशासन का दावा है कि गैस की कोई किल्लत नहीं है और कतारें खत्म हो चुकी हैं, लेकिन इन गुलाबी दावों की हकीकत साहिब के बंगलों से महज चंद कदमों की दूरी पर दम तोड़ रही है। रसोई की चौखट पर रखी खाली टंकी अब महज लोहे का बर्तन नहीं बल्कि आम आदमी की उस बेबसी का प्रतीक बन गई है जहां तकनीक की बुकिंग गरीब की भूख पर भारी पड़ रही है। आलम यह है कि अधिकारियों और माननीयों के आवासों के ठीक बाहर रहने वाले परिवारों के चूल्हे आज ठंडे पड़े हैं। विनय त्रिपाठी जैसी मध्यमवर्गीय चिंता हो या गंगादेई की आंखों का पानी..हर कहानी एक ही सवाल पूछ रही है कि आखिर राहत की लौ क...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.