हिन्दुस्तान ब्यूरो, सितम्बर 26 -- पिछले बिहार विधानसभा चुनाव यानी 2020 में एनडीए ने भले ही सरकार बना ली थी, लेकिन सभी जिलों में उसका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा था। खासकर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायकों की संख्या कम होने के कारण एनडीए को सभी जिलों में अपेक्षाकृत कम सफलता मिली। 8 जिलों में तो एनडीए का खाता भी नहीं खुल था। वहीं सिर्फ दो जिले ऐसे थे जहां महागठबंधन को एक भी सीट नहीं मिली थी। चुनाव में एक ओर एनडीए (जदयू, भाजपा, वीआईपी और हम) तो दूसरी ओर महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, माले) था। तीसरा मोर्चा भी था, जिसमें रालोसपा, बसपा, समाजवादी जनता दल (डेमोक्रेटिक), एआईएमआईएम, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) शामिल थी। लेकिन मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच ही हुआ। यह भी पढ़ें- बिहार में महासमर ...
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