लखनऊ, अप्रैल 12 -- भारतेन्दु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में अन्तिम नाटक अब न बनेगी देहरी का मंचन राज बिसारिया प्रेक्षागृह में किया गया। बिपिन कुमार के निर्देशन में मंचित नाटक के साथ समारोह का समापन हुआ। नाटक डोगरी की प्रसिद्ध लेखिका पद्मा सचदेव के उपन्यास पर आधारित है, जिसका रूपांतरण आसिफ अली ने किया। नाटक की कहानी एक युवा विधवा रेवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पति की अकाल मृत्यु के बाद समाज की विषम परिस्थितियों से हार मानकर आत्महत्या का प्रयास करती है, किंतु शिव मंदिर के युवा महंत गिरीबाबा द्वारा बचा ली जाती है। धीरे-धीरे, मठ के कड़े नियमों में बंधे महंत और बेसहारा रेवती के बीच एक ऐसा आध्यात्मिक प्रेम अंकुरित होता है, जो सामाजिक वर्जनाओं और मर्यादाओं की सीमाओं को चुनौती देने लगता है। नाटक का सार और संदेश त्याग और मानवीय गरि...