नई दिल्ली, जून 11 -- करियर की दुनिया में कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं होतीं, बल्कि हिम्मत, दूरदृष्टि और सही फैसलों की मिसाल बन जाती हैं। भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में रॉयल एनफील्ड और सिद्धार्थ लाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आज जिस 'बुलेट' की आवाज सुनकर युवाओं का दिल धड़क उठता है और जो देश विदेश की सड़कों पर शान से दौड़ती दिखती है. उसे एक दौर में बंद करने की नौबत आ गई थी। जी हां, साल 2000 के आस पास यह मशहूर ब्रांड भारी घाटे में डूब चुका था। लेकिन फिर एंट्री हुई एक 26 साल के नौजवान की, जिसने न सिर्फ इस डूबती नैया को पार लगाया बल्कि इसे एक ग्लोबल आइकन बना दिया। आइए आयशर मोटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ लाल के करियर पर एक नजर।26 की उम्र में मिला कांटों का ताज साल 2000 का वो दौर रॉयल एनफील्ड के लिए किसी बुरे सपने जैसा था। कंपनी हर महीन...