नई दिल्ली, जुलाई 2 -- सुप्रीम कोर्ट इस कानूनी प्रश्न पर विचार करने के लिए सहमत हो गया कि क्या बार-बार गिरफ्तारी के कारण किसी आरोपी को लगातार हिरासत में रखे जाने को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार को एक गैंगस्टर की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता गैंगस्टर अगस्त-2021 से हिरासत में है, जबकि उसे गिरफ्तारी के लिखित आधार नहीं दिए गए थे। शीर्ष अदालत हाजी अब्दुल रज्जाक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उसने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा उसकी 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि उसकी हिरासत को गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में ...