नई दिल्ली, जुलाई 9 -- स्कूली किताबों में क्या पढ़ाया जाना चाहिए और क्या नहीं, इसे लेकर हमारे देश में अक्सर एक अलग तरह की सरगर्मी देखने को मिलती है। अब एक बार फिर से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें चर्चा के केंद्र में हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और सीधे दखल के बाद 8वीं क्लास की सामाजिक विज्ञान की किताब में सिर्फ एक-दो पन्नों का नहीं, बल्कि बहुत बड़े स्तर पर बदलाव किया गया है। यह बदलाव सिर्फ न्यायपालिका से जुड़े उस विवादित चैप्टर तक ही सीमित नहीं है जिस पर अदालत ने गहरी आपत्ति जताई थी। हकीकत यह है कि देश के इतिहास से जुड़े कई अहम पन्नों को एक बिल्कुल नए नजरिए के साथ दोबारा लिखा गया है। नए एडिशन में अब बच्चों को भारत के बंटवारे पर कांग्रेस के रुख, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संघर्ष और सावरकर के ब...