नई दिल्ली, जून 15 -- पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा की राजनीति में लंबे समय से लगभग अज्ञात रही नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) अचानक राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गई है। चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड इस छोटे राजनीतिक दल का नाम तब सुर्खियों में आया जब तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने इसी पार्टी में विलय का रास्ता चुना। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी का चुनावी इतिहास बेहद सीमित रहा है, लेकिन उसका चुनाव आयोग में पंजीकृत होना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। यह भी पढ़ें- 'आरी आरी आरी', इमैनुएल मैक्रों ने धुरंधर के गाने संग शेयर किया PM मोदी का वीडियो नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया चुनाव आयोग के साथ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत ...