नई दिल्ली, अप्रैल 29 -- प्रभाकर मणि तिवारी,वरिष्ठ पत्रकार पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल में होने वाला विधानसभा चुनाव देश के दूसरे राज्यों के मुकाबले अमूमन ज्यादा सुर्खियां बटोरता रहा है, लेकिन इस बार तो यह सत्ता के दो मुख्य दावेदारों, यानी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के लिए नाक और साख ही नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल बन गया है। बीते 15 साल से सत्ता में रही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए यह चुनाव महज चौथी बार सत्ता में वापसी की परीक्षा नहीं है, इसमें पार्टी का अस्तित्व भी दांव पर लगा है। दूसरी ओर, उसे चुनौती देने के लिए इस बार अपने तमाम संसाधन झोंकने वाली भाजपा के लिए भी करो या मरो की स्थिति है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पता है कि बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के लिए उसे इससे बेहतर कोई मौका नहीं मिल सकता। पश्चिम बंगाल का यह चुनाव कई ...