नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब जब बमुश्किल एक पखवाड़ा रह गया है, तब चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) का जिलेवार ब्योरा जारी कर पारदर्शिता बरतने की कोशिश की है। निस्संदेह, इस कार्य के लिए उसकी सराहना की जाती, अगर उसने शुरू से स्वत: ही यह प्रक्रिया अपनाई होती और सुप्रीम कोर्ट को बार-बार एसआईआर से जुड़े मामलों की सुनवाई न करनी पड़ती। बिहार और बंगाल की प्रक्रिया में तो शीर्ष अदालत को हस्तक्षेप तक करना पड़ा। बहरहाल, एसआईआर के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से अब तक 90 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जो वहां की पिछली मतदाता संख्या का लगभग 12 प्रतिशत है। इतनी बड़ी संख्या में हुई सफाई का चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ेगा, इसका विश्लेषण तो खैर परिणाम आने के बाद होगा, अलबत्ता अ...