नई दिल्ली, सितम्बर 7 -- राजन शर्मा दिल्ली में झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसाई गई सत्य निकेतन कॉलोनी आज छात्रों के लिए पीजी के बड़े बाजार में बदल चुकी है। करीब 56 साल पहले विकसित हुए इस इलाके में अब रिहायशी मकानों की जगह बड़े पैमाने पर पेइंग गेस्ट (पीजी), हॉस्टल, कोचिंग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इलाके के करीब 60 फीसदी मकान लीज पर दिए जा चुके हैं, जहां बिना समुचित पंजीकरण और सुरक्षा मानकों के पीजी चलाए जा रहे हैं।साऊथ कैंपस आने के बाद बदल गई कॉलोनी साल 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए सत्य निकेतन इलाके को विकसित किया गया था। लोगों को झुग्गियों के बदले करीब 60 से 65 वर्गमीटर तक के प्लॉट आवंटित किए गए। शुरुआत में यह पूरी तरह रिहायशी कॉलोनी थी, लेकिन साल 1970 के बाद दिल्ली य...