नई दिल्ली, जून 10 -- शहरी इलाके हों या फिर सुदूर क्षेत्र, मोबाइल फोन बेहद जरूरी चीज बन गया है। अब यह लग्जरी नहीं बल्कि जरूरत में शामिल हो गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए ग्राम पंचायत के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें एक कंपनी को गांव में मोबाइल टावर लगाने से रोक दिया गया था। ग्राम पंचायत का कहना था कि मोबाइल टावर से निकलने वाली रैडिएशन से बीमारियां फैलती हैं। हालांकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने पंचायत के प्रस्ताव को गलत बताते हुए टावर लगाने की इजाजत दे दी है। फैसला सुनाते हुए जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और अद्वैत सेथना की बेंच ने कहा, आधुनिक समय में वास्तविकता यह है कि मोबाइल फोन लग्जरी आइटम नहीं बल्कि जरूरत की वस्तु बन गया है। शहरी इलाकों से लेकर सुदूर इलाकों तक संचार का साधन मोबाइल फोन है। यह तकनीकी क्रांति में बड़ा योगदान देता है...
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