हेमलता कौशिक, जून 1 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि गूगल जैसे सर्च इंजन उन मामलों में नाम-आधारित खोज के माध्यम से न्यायिक अभिलेखों को अनिश्चित काल तक प्रदर्शित नहीं कर सकते। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि निजी प्रकृति के हों या आरोपी के बरी होने, आरोपमुक्त किए जाने, कार्यवाही रद्द किए जाने अथवा समझौते के कारण मामले का निस्तारण संबंधी आदेश हों। दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यक्ति के भुला दिए जाने के अधिकार को मान्यता दी है। याचिकाकर्ताओं के एक समूह को राहत देते हुए हाई कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारियों, विभिन्न सर्च इंजन के संचालकों व कानूनी डेटाबेस मंचों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं द्वारा उद्धृत निर्णयों, आदेशों व समाचार लेखों के संबंध में अपनी नाम-आधारित खोज सुविधा को निष्क्रिय करें तथा उन्हें खोज परिणामों से हटा दें (डी-इंडेक्स करें)।...