लखनऊ, अप्रैल 25 -- फेफड़े के आस-पास होने वाली टीबी की पहचान के लिए अब सिर्फ एक जांच पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। लोहिया संस्थान के हालिया शोध में खुलासा हुआ है कि बीमारी की सटीक पहचान के लिए कम से कम दो प्रकार की जरूर जरूरी है। संस्थान के रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा 260 मरीजों पर किया गया यह अध्ययन इटली के प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि फेफड़ों की झिल्ली में पानी भरना (प्लुरल इफ्यूजन) टीबी और कैंसर दोनों का लक्षण हो सकता है। शुरुआत में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। जैसे-जैसे स्थिति गंभीर होती है, मरीज को सांस लेने में दिक्कत बढ़ने लगती है। ऐसे में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच से फेफड़े में पानी भरे होने का पता लगाया जा सकता है। इसके बाद उस पानी की जांच कराई जाती है, जिससे बीमारी...