नई दिल्ली, सितम्बर 17 -- आगामी 15 अक्तूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी यूपीआई भुगतान (खरीदार से दुकानदार को किए जाने वाले भुगतान) पर 0.4 प्रतिशत तक का 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) लगाने संबंधी निर्देश ने आम लोगों को चिंतित कर दिया है। हालांकि, व्यक्ति से व्यक्ति के भुगतान पहले की तरह निःशुल्क रहेंगे और छोटे व्यापारियों को भी छूट मिलेगी, पर यह आशंका निराधार नहीं है कि अब नकद व्यवस्था फिर से लौट सकती है, जो यूपीआई के शुरू होने के साथ बहुत कम रह गई थी। यह सही है कि पिछले छह वर्षों में भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान तंत्र खड़ा किया है। चाय दुकान से लेकर मॉल तक 'स्कैन ऐंड पे' सामान्य व्यवहार बन चुका है, पर आर्थिक सिद्धांत यही कहता है कि जब किसी भुगतान माध्यम की लागत बढ़ती है, तो बाजार कम लागत वाले विकल्प की ओर झुकता है। हा...