वाराणसी, मार्च 19 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। नवरात्र में दुर्गासप्तशती का पाठ आदि शक्ति को प्रसन्न करने का सबसे सशक्त माध्यम है। नवरात्र में प्रतिदिन एक पाठ से 25 पाठ तक, करने का विधान बताया गया है। शास्त्रों में हर पाठ के अलग-अलग फल बताए गए हैं। भृगुसंहिता विशेषज्ञ पं.वेदमूर्ति शास्त्री बताते हैं कि नवरात्र में प्रतिदिन दुर्गासप्तशती के एक पाठ से फल सिद्धि प्राप्ति होती है। तीन पाठ से उपद्रव शांति और नित्य पांच पाठ करने से सर्वशांति होती है। प्रतिदिन सात पाठ करने पर भय मुक्ति और नौ पाठ से यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। दुर्गासप्तशती के नित्य 11 पाठ से राज्य की प्राप्ति का फल बताया गया है। 12 पाठ से कार्यसिद्धि, 14 पाठ से सुख-संपत्ति और 16 पाठ से धन एवं पुत्र की प्राप्ति होती है। 17 पाठ से राजभय, शत्रु भय और रोग भय से मुक्ति मिल जाती ...