मुजफ्फरपुर, फरवरी 1 -- मुजफ्फरपुर। फर्नीचर बाजार के रूप में विख्यात शहर का चंद्रलोक चौक अब बाहरी सामान का विक्रय केंद्र बनकर रह गया है। सहारनपुर और सिलीगुड़ी से पार्ट-पार्ट में सामग्री मंगवाकर केवल असेंबल और रंग-रोगन कर फर्नीचर बेचना ही मुख्य व्यवसाय रह गया है। कभी इमारती लकड़ियों से खुद एक से बढ़कर एक फर्नीचर बनाने वाली इस मंडी की मौजूदा स्थिति ने कारीगरों के जीवन पर बड़ा असर डाला है। पुश्तैनी पेशा वाले हुनरमंद हाथों को वह काम नहीं मिल रहा है, जिसके लिए वे जाने जाते थे। व्यवसाय के इस बदले स्वरूप ने तो कई दुकानदारों की हैसियत ही बदल दी है। अब इनकी भी पूछ महज फर्नीचर मरम्मत करने वाले कारीगर के रूप में होने लगी है। लकड़ियों की महंगाई के कारण बाजार ने जो पीवीसी या आर्टिफिशियल वाटरप्रूफ फर्नीचर जैसे विकल्प दिए हैं, उसने परंपरागत काष्ठ कला को ...
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