विधि संवाददाता, सितम्बर 19 -- उत्तर प्रदेश में साल-2013 में यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP TET) के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक नियुक्त किए गए कुछ अभ्यर्थियों से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि सरकारी नियुक्ति जिस प्रमाणपत्र के आधार पर हुई, वह निर्णायक रूप से फर्जी पाया जाता है तो ऐसी नियुक्ति शुरू से ही शून्य मानी जाएगी। ऐसी नियुक्ति को रद्द करना दंडात्मक बर्खास्तगी नहीं है, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के तहत नियमित विभागीय जांच कराना जरूरी नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कारण बताओ नोटिस देना और प्राकृतिक न्याय के व्यापक सिद्धांतों का पालन करना पर्याप्त है। हालांकि कोर्ट ने स...