नई दिल्ली, अक्टूबर 17 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों अथवा दूसरे व्यक्तियों के प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कक्षा एक से आठ तक के सभी शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और शैक्षिक अभिलेखों की जांच कराने का आदेश दिया है। शिक्षकों को संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में अधिसूचना जारी होने की सूचना मिलने के एक सप्ताह के भीतर अपने दस्तावेज जमा करने होंगे। न्यायालय ने जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी भी दी है। न्यायालय ने यह आदेश कुसुमलता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान विशेष कार्य बल (एसटीएफ), लखनऊ के अपर पुलिस अ...