नई दिल्ली, मई 16 -- भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन के मामले में बड़ा रोल रहा है। इसकी गति, सटीकता और इंटरसेप्ट करने में कठिनाई ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को बढ़त दिलाई। पाकिस्तान पारंपरिक रूप से बैलिस्टिक मिसाइलों, सबसोनिक क्रूज सिस्टम और न्यूक्लियर डिटरेंस पर निर्भर रहा। अब पाकिस्तान ने फतह-3 मिसाइल का परीक्षण कर ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक प्रिसीजन स्ट्राइक क्षमता हासिल करने का दावा किया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह दावा सतही है। असल में यह चीन की तकनीकी मदद का नतीजा है, न कि पाकिस्तान की स्वदेशी उपलब्धि। फतह-3 की अस्पष्टता और चीन से जुड़ाव इसे ब्रह्मोस की तुलना में कमजोर बनाते हैं। यह भी पढ़ें- बंगाल विधानसभा का स्पीकर बनते ही रच दिया इतिहास, कौन हैं रतिंद्र बोस भारत-रूस संयुक्त परियोजना ब्रह्मोस की ...