मुजफ्फरपुर, मई 11 -- प्रतिबंध के बावजूद प्लास्टिक थैले का उपयोग और निर्माण जारी है। शहर से निकलने वाले कचरे के आधा से अधिक हिस्से में इनकी मौजूदगी चिंता का कारण बन गई है। सामाजिक संगठनों से जुड़े शहर के बुद्धिजीवियों ने कहा कि यह न केवल पर्यावरण प्रदूषण, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं। प्लास्टिक थैला निगल जाने से मवेशियों की मौत तक हो रही है, लेकिन प्रशासन से लेकर समाज के स्तर पर अनदेखी जारी है। प्रशासन के द्वारा प्रतिबंध का सख्ती से पालन के अलावा सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार जागरूकता मुहिम चले तो शहर को भविष्य के बड़े खतरे से बचाया जा सकता है। केंद्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक थैलों का इस्तेमाल, बिक्री और निर्माण पर एक जुलाई 2022 से ही देशभर में प्रतिबंध लगा रखा है। बावजूद इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। प्रशासनिक स्तर ...