मेरठ, जून 7 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर शांतिनाथ महामंडल विधान के 18वें दिन 108 परिवारों द्वारा विधान की मांगलिक क्रियाएं की। विधान में शांतिधारा करने का सौभाग्य रेणु जैन, रजनीश जैन, महक, पुलकित जैन को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात नित्य नियम पूजन किया गया। आचार्य भाव भूषण जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि वीतराग विज्ञान ही कल्याण का सच्चा मार्ग है। सबसे अच्छी संगत साधु की होती है। सच्चे साधु का समागम जीवन में परिवर्तन लाता है। साधु अंतरात्मा की सफाई पर बल देते हैं। शांत जीवन के लिए सत साहित्य की शरण लेनी चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि आत्म ज्ञान ही सम्यक ज्ञान है। सम्यक ज्ञानधारी सांसारिक दुखों से छुटकारा पा लेते हैं, लेकिन भौतिक ज्ञान संसार में भटकाता है, जहां राग द्वेष नहीं है, वहां सम्यक ज्ञान है। प्रेम वसुधैव कुटुंबकम की भावनाओं को...