मेरठ, अप्रैल 3 -- 'प्रेम मात्र से प्रकट होते हैं कण-कण में विराजमान शिव...' कथावाचक डॉ. सर्वेश्वर द्वारा शिव कथा में दिव्य प्रवचनों से माहौल को शिवमय बना दिया। गढ़ रोड स्थित बुद्धा गार्डन में चल रही दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की सात दिवसीय श्री शिव कथा के दूसरे दिन भक्तों में श्रद्धा और उत्साह नजर आया। कथा के दूसरे दिन दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के शिष्य एवं विश्व-विख्यात कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर ने समुद्र मंथन प्रसंग का वर्णन किया। बताया कि जब समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला, तब संपूर्ण सृष्टि की रक्षा हेतु भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका नाम 'नीलकण्ठ' पड़ा। डॉ. सर्वेश्वर ने इस प्रसंग का गूढ़ अर्थ समझाते हुए कहा कि महादेव का नीलकण्ठ स्वरूप हमें त्याग, सहनशीलता और परोपकार की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सच्चा शिव भक...